शॉर्ट टर्म डेट फंडों में निवेश बढ़ रहा है।

डेट फंड्स में निवेशकों की दिलचस्पी बहुत तेजी से बढ़ रही है. खासतौर पर लिक्विड और अल्ट्रा शॉर्ट पीरियड सहित छह महीने में मैच्योर होने वाले फंड्स में। इन कैटेगरी के म्यूचुअल फंड्स में जुलाई में जबरदस्त निवेश हुआ है. यह पिछले तीन महीने का सबसे बड़ा निवेश है।

जुलाई में शॉर्ट टर्म फंड में 73,700 करोड़ का निवेश

डेट फंड्स में जुलाई के महीने में सबसे ज्यादा निवेश किया गया। जुलाई में लिक्विड और अल्ट्रा शॉर्ट ड्यूरेशन फंडों में 73,700 करोड़ रुपये का निवेश किया गया था। एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स ऑफ इंडिया (एएमएफआई) के मुताबिक, यह पिछले तीन महीने में सबसे ज्यादा निवेश है।

जानकारों का मानना ​​है कि डेट फंडों में निवेश बढ़ने की एक वजह आरबीआई द्वारा बैंक दरों पर यथास्थिति बनाए रखना है। पिछले हफ्ते आरबीआई की एमपीसी बैठक में रेपो रेट समेत प्रमुख बैंक दरों में कोई कटौती नहीं की गई। हालांकि नीति समिति के एक सदस्य का मानना ​​था कि इन्हें काटा जाना चाहिए। लेकिन आरबीआई पर अभी भी महंगाई का दबाव है।

शॉर्ट टर्म फंड में निवेश क्यों बढ़ रहा है?

ब्लूमबर्ग के मुताबिक फंड्सइंडिया के रिसर्च हेड अरुण कुमार का कहना है कि निवेशक शॉर्ट टर्म म्यूचुअल फंड में निवेश कर सुरक्षित दांव खेलना चाहते हैं. निवेशकों का मानना ​​है कि अगले एक या दो साल में ब्याज दरें बढ़ेंगी। जब ऐसा होता है, तो फंड का कार्यकाल जितना लंबा होगा, प्रभाव उतना ही अधिक नकारात्मक होगा।

निवेशकों के पास शॉर्ट ड्यूरेशन फंड में निवेश करके जल्दी बाहर निकलने का विकल्प होता है। विशेष रूप से केंद्रीय बैंकों की नीतियों में अनिश्चितता को देखते हुए, उनका पैसा लंबे समय तक म्यूचुअल फंड में बंद रहता है। ऐसे में फंड के लिए खरीदारी कम हो जाती है।

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महंगाई के दबाव में निवेशकों ने बदली रणनीति

महंगाई के दबाव और आरबीआई की नीति को देखते हुए तीन महीने में मैच्योर होने वाले म्यूचुअल फंड में 31,470 करोड़ रुपये का निवेश किया गया। वहीं, मनी मार्केट फंड में 20,900 करोड़ रुपये का निवेश किया गया। एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स ऑफ एसोसिएशन के आंकड़ों के मुताबिक, मीडियम से लॉन्ग टर्म फंड्स में 1,733 करोड़ रुपये बिके। 10 साल के सरकारी बॉन्ड में 47.2 करोड़ रुपये की बिकवाली हुई।

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