घटी जीडीपी विकास दर: रेटिंग एजेंसी मूडीज इन्वेस्टर्स सर्विसेज ने भारत की विकास दर का अनुमान घटाकर 9.6 फीसदी कर दिया है। मूडीज ने इससे पहले विकास दर का अनुमान 13.9 फीसदी रखा था। रेटिंग एजेंसी ने भले ही चालू वर्ष के लिए 9.3 प्रतिशत की वृद्धि दर का अनुमान लगाया है, लेकिन वित्त वर्ष 2020-21 में जीडीपी विकास दर घटकर 7.3 प्रतिशत रहने को देखते हुए वास्तविक विकास दर 2.3 प्रतिशत ही रहेगी। वित्त वर्ष 2019-20 में विकास दर 4 फीसदी थी। वहीं, वित्त वर्ष 2020-21 की पहली तिमाही में विकास दर में 23.9 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।

भारत का क्रेडिट प्रोफाइल जोखिम बढ़ा

इससे पहले मूडीज ने वित्त वर्ष 2020-21 में 9.3 फीसदी की विकास दर का अनुमान जताया था। लेकिन कोरोना की दूसरी लहर ने भारत के क्रेडिट प्रोफाइल का जोखिम बढ़ा दिया है। ‘मैक्रोइकॉनॉमिक्स-इंडिया’ नाम की मूडीज की रिपोर्ट में कहा गया है कि अप्रैल और मई में कोविड के कारण लगाए गए लॉकडाउन ने आर्थिक गतिविधियों की रफ्तार रोक दी थी। मूडीज के मुताबिक, ‘वायरस की दूसरी लहर ने अनिश्चितता पैदा कर दी है। हालांकि संभावना है कि यह आर्थिक नुकसान अप्रैल से जून की तिमाही के बीच ही रहेगा।

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कोरोना की दूसरी लहर का कहर

मूडीज की रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय अर्थव्यवस्था 9.6 फीसदी की दर से बढ़ेगी। वहीं, 2022 में इसके 7 फीसदी की दर से बढ़ने की उम्मीद है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत की विकास दर काफी हद तक टीकाकरण पर निर्भर करेगी। मूडीज ने कहा है कि जून के तीसरे हफ्ते तक भारत सिर्फ 16 फीसदी आबादी का ही टीकाकरण कर पाया था. साल की दूसरी छमाही में अर्थव्यवस्था में तेजी देखने को मिल सकती है क्योंकि टीकाकरण में बढ़ोतरी से आर्थिक गतिविधियों में भी तेजी आएगी। मूडीज की एक रिपोर्ट के मुताबिक पिछले साल की तुलना में इस साल कोविड-19 की लहर से होने वाले नुकसान में कमी आई है, हालांकि मध्यम वर्ग और निम्न आय वर्ग की आय में गिरावट आई है.

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