पीएमआईसर्वेक्षण में कहा गया है कि महामारी के बढ़ने और कच्चे माल को हासिल करने में कठिनाइयों से विनिर्माण क्षेत्र की वृद्धि पर अंकुश लगा।

कोरोना पर काबू पाने के लिए देश के अलग-अलग राज्यों में लगाए गए लॉकडाउन और पाबंदियों ने मैन्युफैक्चरिंग की रफ्तार धीमी कर दी है. फैक्ट्रियों में काम कम होने से स्टॉक घटने के साथ ही रोजगार में भी कमी आई है। मैन्युफैक्चरिंग एक्टिविटी इंडेक्स पीएमआई अप्रैल के 55.5 से घटकर मई में 50.8 रह गया है। यह पिछले दस महीने का सबसे निचला स्तर है।

मांग नहीं होने से फैक्ट्रियों ने घटाया उत्पादन

कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर से मांग में भारी गिरावट आई है। इस वजह से कंपनियों ने उत्पादन धीमा या बंद कर दिया है। मारुति, महिंद्रा एंड महिंद्रा, टाटा जैसी कार निर्माताओं और हीरो और टीवीएस जैसी दोपहिया कंपनियों ने हाल ही में कुछ दिनों के लिए अपने कारखानों में उत्पादन रोक दिया है। पीएमआई जारी करने वाली एजेंसी आईएचएस मार्किट के आर्थिक सहयोगी निदेशक पोलियाना डी लीमा के अनुसार, जनवरी-मार्च तिमाही में भारत का विनिर्माण उत्पादन 6.9 प्रतिशत बढ़ा। इस दौरान जीडीपी ग्रोथ 1.6 फीसदी रही. मार्च 2021 को खत्म हुए वित्त वर्ष के दौरान जीडीपी में 7.3 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई थी. यह देश के इतिहास में अब तक की सबसे बड़ी जीडीपी गिरावट है।

दूसरी लहर से घटे रोजगार, 11 महीने बाद मई 2021 में बेरोजगारी दर दहाई अंक में पहुंची

मैन्युफैक्चरिंग में गिरावट के कारण बड़ी संख्या में मजदूर बेरोजगार हो गए

लीमा के मुताबिक, मंदी के लंबे समय तक रहने की संभावना को देखते हुए कंपनियों ने उत्पादन के लिए कच्चा माल खरीदना कम कर दिया है। उत्पादन में गिरावट के कारण नौकरियों में भी कमी आई है। जिन राज्यों में लॉकडाउन है, वहां पूर्व में फैक्ट्रियों में उत्पादन लगभग बंद रहा। इससे स्थानीय लोगों के साथ प्रवासी मजदूरों को भी काम नहीं मिल रहा था। आईएचएस मार्किट के आकलन के मुताबिक फिलहाल आगे विनिर्माण माहौल को लेकर स्थिति निराशाजनक है। इसका सबसे ज्यादा असर रोजगार पर पड़ सकता है। कोरोना की दूसरी लहर के कारण मई 2021 में बेरोजगारी दर बढ़कर 11.9 प्रतिशत हो गई, जबकि इससे पिछले महीने अप्रैल 2021 में 7.97 प्रतिशत थी।

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