दालों की कीमतों पर नियंत्रण के लिए सरकार की स्टॉक लिमिट

दालों की कीमतों पर नियंत्रण के लिए सरकार ने मूंग को छोड़कर सभी दालों के लिए स्टॉक लिमिट लगा दी है. मार्च से दालों की बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने के लिए थोक विक्रेताओं, खुदरा विक्रेताओं, मिल मालिकों और आयातकों के लिए यह स्टॉक सीमा लगाई गई है। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है। इसे थोक विक्रेताओं, खुदरा विक्रेताओं, मिल मालिकों और आयातकों पर लागू किया गया है।

खुदरा व्यापारियों के लिए पांच टन स्टॉक की सीमा तय fixed

सरकार ने खुदरा व्यापारियों के लिए पांच टन की स्टॉक सीमा तय की है, जबकि थोक विक्रेताओं और आयातकों के लिए 200 टन की सीमा तय की गई है। इसमें किसी एक किस्म का स्टॉक 100 टन से अधिक नहीं हो सकता। दलहन मिलें भी अपनी कुल वार्षिक क्षमता के 25 प्रतिशत से अधिक का स्टॉक नहीं कर पाएंगी। मंत्रालय के अनुसार, यदि स्टॉक निर्धारित सीमा से अधिक है, तो उन्हें उपभोक्ता मामलों के विभाग के ऑनलाइन पोर्टल पर घोषित करना होगा। स्टॉक आदेश की अधिसूचना की तारीख से 30 दिनों के भीतर लाया जाना है। मार्च-अप्रैल में दालों के दामों में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिली है.

एक साल में तेजी से बढ़े हैं दालों के दाम

पिछले कुछ महीनों में दालों की कीमतों में तेजी से इजाफा हुआ है। मंडियों में भी दाल न्यूनतम समर्थन मूल्य से अधिक है। अरहर दाल के दाम 120 रुपये के ऊपर पहुंच गए हैं. मूंग और मसूर दाल के दाम भी बढ़े हैं. पिछले दो साल से इसका आयात बढ़ा है। वित्तीय वर्ष 2013-14 के दौरान 34 लाख दालों का आयात किया गया। वहीं, 2014-15 में यह बढ़कर 44 लाख टन हो गया था। वर्ष 2015-16 में 56 लाख टन दाल का आयात किया गया था। 2017-18 में इसमें मामूली कमी आई थी और यह 54 लाख टन थी। दालों की खुदरा कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। खरीफ सीजन में दालों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में और इजाफा हुआ है.

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